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“सब्र का बांध”

धीमी कर दी
उसकी रफ्तार
खड़ी कर
कंक्रीट की दीवार

ऊर्जा उसकी
फोर के रेसोल्यूशन
ए सी को दी गई
ब्रौकली लेटइस ब्लूबैरी अमीर की गई

जिस्म से उसके
जल क्रीड़ा के नाम पर खेला गया
द्वार कभी बंद कभी खुले
अपनी सहूलियत से
वेग “झेला”गया

ऊर्जाविहीन प्यासी वो
नंगे पांव
समुद्र की तलाश में चलने लगी
मीलों बाद
मिलन की उम्मीद ढलने लगी
गर्मी – धूप में
क्रांति की आग जलने लगी
नदी
भाप में बदलने लगी
ये कहानी
यूं ही चलने लगी
आज बादल तैयार है
………….
फटने को
देखना
……..
“सब्र का बांध” कहीं टूट ना जाए ।।।

About Author /

अभिमन्यु कमलेश राणा हिमाचल प्रदेश के एक राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर हैं। वह वर्तमान में भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग में सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा, उन्हें कविता पढ़ने और लिखने का शौक है। उन्होंने विभिन्न साहित्यिक समारोहों में भाग लिया है। अभिमन्यु शब्दों की शक्ति में विश्वास रखते हैं और कलम को भावों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त साधन मानते हैं

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